Motion. गति
हम अपने चारों ओर की सृष्टि को देखकर आते हैं कि कुछ वस्तुओं में समय के साथ साथ उनकी स्थिति में परिवर्तन होता है जबकि कुछ अपने स्थान पर ही स्थिति रहती है उदाहरण के रूप में हमारे सामने से जाती है रेलगाड़ी, मोटर आदि की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन होता है। जबकि मेज पर पड़ी किताब आदि में परिवर्तन नहीं होता है, इससे पता चलता है कि हमारे चारों ओर स्थित बस्तुयें या वस्तुएं जो स्थित है या गतिमान है परंतु वस्तु की यह स्थिरता अथवा गति हमारे सापेक्ष है, क्योंकि हो सकता है जो वस्तुएं हमें गति में दिखाई देती हैं किसी और दृष्टा की दृष्टि में वह स्थित है जैसे हमारे सामने एक रेलगाड़ी जा रही है तो हमारी अपेक्षा रेलगाड़ी की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन होता है, इसलिए गति कहते हैं की रेलगाड़ी गति में है, परंतु उसमें बैठे यात्री की अपेक्षा से गाड़ी की स्थिति में समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता। अतः उस यात्री की अपेक्षा रेल स्थित है, अतः स्थिरता अथवा गति की अवस्थाओं का वर्णन सापेक्ष होता है।
गति के प्रकार
मुख्यतः गति को तीन भागों में बांटा जा सकता है-
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