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अम्बे जी की आरती | जय अम्बे गौरी | दुर्गा आरती इन ह‍िंदी | Ambe Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi. Om Jai Ambe Gauri Aarti in Hindi | माता की आरती इन हिंदी

जय अम्बे गौरी | दुर्गा आरती इन ह‍िंदी | Ambe Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi. Om Jai Ambe Gauri Aarti in Hindi | माता की आरती इन हिंदी  अम्बे जी की आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।। मांग सिंदूर विराजत, टीको मृग मद को । उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्र बदन नीको ।। कनक समान कलेवर, रक्ताम्बार राजे । रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै ।। केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुःख हारी। कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।। शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ।। चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु, कैटभ दोउ मारे, सुर-भयहीन करें ।। ब्राह्मणी ऊद्राणी मैया, तुम कमला रानी। आगम- निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरु। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु ।। तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुःख हरता, हुआ सम्पत्ति करता।। भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ।। कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्री मालके...

त्वरण (acceleration )। न्यूटन के गति विषयक नियम(Newton's laws of Motion)

  त्वरण(Acceleration)-  यह आवश्यक नहीं है जो वस्तु गतिमान है, उसका वेग सदैव एक समान ही रहते हैं यह भी हो सकता है कि उसका वेग भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न है यदि समय के साथ वस्तु का वेग बढ़ता है या घटता है तो ऐसी गति को त्वरित गति कहते हैं। तथा यह बताने के लिए कि वेग में किस दर से परिवर्तन होता है हम एक नई दिशा नई राशि 'त्वरण' का प्रयोग करते हैं। अतः किसी गतिमान वस्तु के वेग में प्रति एकांक  समय अंतराल में होने वाले परिवर्तन को उस वस्तु का त्वरण करते हैं। त्वरण = वेग में परिवर्तन/समयांतराल त्वरण एक सदिश राशि है। न्यूटन के गति विषयक नियम (Newton's law of motion) - गतीविषयक हमारा ज्ञान तीन मूल नियमों पर आधारित है। इनमें सबसे पहले महान वैज्ञानिक सर आइज़क न्यूटन ने सन 1687 में अपनी पुस्तक प्रिंसिया में प्रतिपादित किया इसलिए इस वैज्ञानिक के समानार्थी नियमों को न्यूटन के गति विषयक नियम करते हैं। गति विषयक प्रथम नियम(first laws of Motion) - इस नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में या एक सरल रेखा में समान वेग से गतिशील रहती है उसकी विराम अवस्था या समान गति अवस्था जब उस प...

Shiv Chalisa in Hindi || shiv chalisa lyrics in hindi || shiv chalisa aarti || Shiv Chalisa in Hindi Lyrics image || शिव चालीसा हिंदी में PDF || शिव चालीसा

 शिव चालीसा (Shree Shiv chalisa)           ।। दोहा ।। जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्या दास तुम,देउ अभय वरदान।।            ।। चौपाई ।। जय गिरजापति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला।। भाल चंद्रमा सोहत नीके । कानन कुंडल नागफनी के।। अंग गौर सिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये।। वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे।। मैना मातु की हवै दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी।। कर त्रिशूल सोहर छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी।। नंदि गणेश सौहैं तहॅऺ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे।। कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ।। देवन जबहिं जाय पुकारा।। तबहिं दुःख प्रभु आप निवारा।। कियो उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुम ही जुहारी।। तुरत षदानन आप पठायो । लव निमेष महं मारि गिरायो।। आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा।। त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई।। किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरव प्रतीज्ञा तासु पुरारी।। दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं।। वेद नाम महिमा तब गाई। अकथ अनादि...