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अम्बे जी की आरती | जय अम्बे गौरी | दुर्गा आरती इन ह‍िंदी | Ambe Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi. Om Jai Ambe Gauri Aarti in Hindi | माता की आरती इन हिंदी

जय अम्बे गौरी | दुर्गा आरती इन ह‍िंदी | Ambe Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi. Om Jai Ambe Gauri Aarti in Hindi | माता की आरती इन हिंदी  अम्बे जी की आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।। मांग सिंदूर विराजत, टीको मृग मद को । उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्र बदन नीको ।। कनक समान कलेवर, रक्ताम्बार राजे । रक्तपुष्प गलमाला, कंठन पर साजै ।। केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुःख हारी। कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।। शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ।। चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु, कैटभ दोउ मारे, सुर-भयहीन करें ।। ब्राह्मणी ऊद्राणी मैया, तुम कमला रानी। आगम- निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरु। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु ।। तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुःख हरता, हुआ सम्पत्ति करता।। भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ।। कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्री मालके...

श्री हनुमान जी की आरती | श्री हनुमान जी की आरती |हनुमान चालीसा आरती Lyrics |आरती की जय हनुमान लला की | हनुमान चालीसा आरती | हनुमान चालीसा आरती Lyrics

   श्री हनुमान जी की आरती | हनुमान चालीसा आरती Lyrics | आरती की जय हनुमान लला की | हनुमान चालीसा आरती |  हनुमान चालीसा आरती Lyrics    श्री हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की । जाके बल से गिरिवर काॅंपैं, रोग दोष जाके निकट न झाॅंपै । अंजनि पुत्र महा बलदाई, सन्तन के प्रभु सदा सहाई । दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सीय सुधि लाये । लंका सो कोट समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई। लंका जारि असुर संहारे, सियाराम जी के काज सॅंवारे । लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, आनि सजीवन प्राण उबारे। पैठि पताल तोरि जम- कारे, अहिरावन की भुजा उखारे। बायें भुजा असुर दल मारे, दाहिने भुजा संत जन तारे। सुर नर मुनि जन आरती उतारें, जै जै जै हनुमान उचारें। कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई। जो हनुमान जी की आरती गावै, बसि बैकुण्ठ परम पद पावै । लंक विध्वंस किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीरति गाई। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।      ।। इति श्री हनुमान जी की आरती सम्पूर्ण ।।

Jai Shiv Omkara ।। शिव आरती हिंदी में Lyrics ।। जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में ।। शिवजी की आरती ।।shiv chalisa aarti

Jai Shiv Omkara ।। शिव आरती हिंदी में Lyrics ।।  जय शिव ओंकारा आरती हिंदी में ।।  शिवजी की आरती ।।shiv chalisa aarti  आरती श्री शिव जी की । जय शिव ओंकारा हर हर शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ।। जय ।। एकानन चतुरानन पंचानन राजै । हॅंसानन गरुड़ासन  वृषवाहन साजै ।। जय ।। दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ।। जय ।। अक्ष माला वनमाला मुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद चन्दा भाले शुभकारी ।। जय ।। श्वेतांम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे । सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे ।। जय ।। कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूल धर्ता । जग कर्ता जगहर्ता जग पालन कर्ता ।। जय ।। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रवणाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ।। जय ।। काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठ भोग लगावत महिमा अति भारी ।। जय ।। त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावैं  । भजत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावैं ।। जय ।।

आरती बृहस्पति देव की|भगवान जगदीश्वर जी की आरती | बृहस्पति देव की कथा और आरती || बृहस्पति भगवान की कथा || विष्णु भगवान की व्रत की कथा || विष्णु भगवान की कथा और आरती Lyrics || brihaspativar vrat katha || वीरवार की व्रत कथा आरती || brihaspativar vrat katha aarti

बृहस्पति देव की कथा और आरती || बृहस्पति भगवान की कथा || विष्णु भगवान की व्रत की कथा || विष्णु भगवान की कथा और आरती Lyrics || brihaspativar vrat katha  || वीरवार की व्रत कथा आरती || brihaspativar vrat katha aarti आरती बृहस्पति देव की | जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन-छिन  भोग लगाऊॅं,कदली फल मेवा।। ॐ।। तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।  जगत॒पिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ ।। चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता  । सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ।। ॐ ।। तन, मन, धन अर्पण कर जो जन शरण पड़े। प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े ।। ॐ ।। दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी । पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ।।ॐ ।। सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारी । विषय विकार मिटाओ, सन्तन सुखकारी ।। ॐ ।। जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे । जेठानन्द आननदकर सो निश्चय पावे ।। ॐ ।। भगवान जगदीश्वर जी की आरती ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करें ।। ॐ ।। जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का । सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ।। ॐ ।...

Caulk means in Hindi

  Caulk means - क्या मतलब है कैंब्रिज डिक्शनरी के अनुसार caulk एक पदार्थ (substance) या पदार्थ है जिसका उपयोग किसी चीज के किनारे के आसपास के अंतराल को भरने के लिए किया जाता है। एक अन्य परिभाषा के अनुसार- caulk "विभिन्न संरचनाओं और पाइपिंग में रिसाव के खिलाफ जोड़ों को सील करने के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री है।"      एक उदाहरण जहां एक पदार्थ का उपयोग किया जा सकता है उसमें एक बाथरूम और एक रसोई शामिल है, वाटरप्रूफ सिलेट है। जिसे किसी DIY स्टोर से खरीदा जा सकता है। 

करवा चौथ व्रत कथा - प्रथम कथा

 करवा चौथ व्रत कथा- प्रथम कथा  एक साहूकार था, उसके साथ बेटे और एक बेटी थी। साथ में भाई व बहन एक साथ बैठकर भोजन करते थे। एक दिन कार्तिक की चौथ का व्रत आया तो भाई बोला कि बहन आओ भोजन करें। बहन बोली कि आज करवा चौथ का व्रत है, चांद उगने पर ही खाऊंगी। सब भाइयों ने सोचा कि चांद उगने तक बहन भूखी रहेगी तो एक भाई ने दिया जलाया, दूसरे भाई ने छलनी लेकर उसे ढॅंका और नकली चाॅंद दिखा कर बहन से करने लगे कि चल चांद उग आया है- अध्य दे ले। बहन अपनी भाभियों से कहने लगी  चलो अध्य दें तो भाभियां बोलीं, तुम्हारा चांद  उगा  होगा हमारा चांद तो रात को उगेगा। बहन ने जब अकेले ही अध्य दे दिया और खाने लगी तो पहले ही ग्रास में बाल आ गया, दूसरे ग्रास में कंकड़ आया, और तीसरा ग्रास मुंह की ओर किया तो उसकी ससुराल से संदेश आया उसका पति बहुत बीमार है, जल्दी भेजो। मां ने जब लड़की को विदा किया तो कहा कि रास्ते में जो भी मिले उसके पांव लगना और जो कोई सुहागा का आशीष दे तो उसके पल्ले में गांठ लगाकर उसे कुछ रुपए देना। बहन जब भाइयों से विदा हुई तो रास्ते में जो भी मिला उसने यही आशीष दिया की तुमने सात भाइ...

करवा चौथ व्रत कथा विधि

करवा चौथ व्रत कथा- सरल हिंदी भाषा में इस ब्लॉग में बताया गया है इसमें व्रत की कथा, व्रत का विधान तथा 4 कहानियों एवं आरतियों सहित विस्तृत वर्णन किया गया है। यह माना जाता है कि इस व्रत का प्रभाव बहुत प्राचीन से है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति के दीर्घायु के लिए करती हैं । तथा मनोकामना करती हैं उनका पति अच्छे स्वास्थ्य  और अच्छी जीवनशैली सुख में जीवन व्यतीत करें।   करवा चौथ व्रत कथा।  यह व्रत अति प्राचीन है। इसका प्रचलन महाभारत से पूर्व का है। यह व्रत सौभाग्वती महिलाओं के लिए उत्तम माना गया है। सामान्य मान्यता के अनुसार सुहागिनों इस व्रत को अपने सुहाग (पती) की दीर्घायु के लिए रखती हैं। कहा जाता है कि इसे पाण्डवों की पत्नी को पति ने भी किया था। समय- यह व्रत कार्तिक कृष्ण की चंद्रोदय चतुर्थी में किया जाता है। व्रत की विधि- कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ करते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह बहुत ही श्रेष्ठ व्रत है। स्त्रियां इस व्रत को पति के दीर्घ जीवी होने के लिए करती हैं। इस दिन सुहागिन स्त्रियां चावल पीसकर दीवार को करवा चौथ बनाती हैं जिसे वर कहते ह...

श्री दुर्गा चालीसा( Shree Durga Chalisa) | जय माता दी। श्री दुर्गा चालीसा।| durga chalisa path hindi mai || durga chalisa || नमो नमो दुर्गे सुख करनी Lyrics || Durga chalisa in hindi

श्री दुर्गा चालीसा(   Shree Durga Chalisa)  |   जय माता दी। श्री दुर्गा चालीसा।| durga chalisa path hindi mai || durga chalisa || नमो नमो दुर्गे सुख करनी Lyrics || Durga chalisa in hindi  जय माता दी। श्री दुर्गा चालीसा।          ।।  श्लोक मंत्र ।।  ॐ सर्व मंगल मागल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरणये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ।।              ।। चौपाई ।। नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।। निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूॅं लोक फैली उजियारी।। शशि ललाट मुख महा विशाला।  नेत्र लाल भृकुटी विकराला।। रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे।। तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना।। अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुंदरी बाला।। प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिव शंकर यारी।। शिव योगी तुम्हारे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें।। रूप सरस्वती को तुम धारा। दे  सुबुद्धि ऋषि मुनीन उबारा।। धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़ कर खम्बा।। र...

श्री बजरंग बाण | Shree Bajrang Ban | बजरंग बाण पाठ ।। सम्पूर्ण बजरंग बाण ।।बजरंग बाण

        जय श्री राम जय बजरंगबली  श्री बजरंग बाण ।( Bajrang ban)                   ।। दोहा ।  निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।  तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।                                 ।। चौपाई ।। जय हनुमान संत हितकारी।  सुन लीजिए प्रभु अरज हमारी। । जन के काज विलंब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख  दीजै।।  जैसे कूदि  सिंधु महिपारा । सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।  आगे जाय लंकिनी रोका।  मारेहु लात गई सुर लोका ।। जाय विभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम- पद लीन्हा।।  बाग उजारि सिंधु महं बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।। अक्षय कुमार को मारि संहार । लूम लपेट लंक को जारा।।  लाह समान लंक जरि गई।  जय जय धुनि सुर पुर में भई।।   अब विलंब केहि कारण स्वामी।  कृपा करहु उर अंतर्यामी ।। जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर होय दुःख करहु नीपाता।।   जय गिरधर जय जय सुख ...

Shiv Chalisa in Hindi || shiv chalisa lyrics in hindi || shiv chalisa aarti || Shiv Chalisa in Hindi Lyrics image || शिव चालीसा हिंदी में PDF || शिव चालीसा

 शिव चालीसा (Shree Shiv chalisa)           ।। दोहा ।। जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्या दास तुम,देउ अभय वरदान।।            ।। चौपाई ।। जय गिरजापति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला।। भाल चंद्रमा सोहत नीके । कानन कुंडल नागफनी के।। अंग गौर सिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये।। वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे।। मैना मातु की हवै दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी।। कर त्रिशूल सोहर छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी।। नंदि गणेश सौहैं तहॅऺ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे।। कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ।। देवन जबहिं जाय पुकारा।। तबहिं दुःख प्रभु आप निवारा।। कियो उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुम ही जुहारी।। तुरत षदानन आप पठायो । लव निमेष महं मारि गिरायो।। आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा।। त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई।। किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरव प्रतीज्ञा तासु पुरारी।। दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं।। वेद नाम महिमा तब गाई। अकथ अनादि...

त्वरण (acceleration )। न्यूटन के गति विषयक नियम(Newton's laws of Motion)

  त्वरण(Acceleration)-  यह आवश्यक नहीं है जो वस्तु गतिमान है, उसका वेग सदैव एक समान ही रहते हैं यह भी हो सकता है कि उसका वेग भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न है यदि समय के साथ वस्तु का वेग बढ़ता है या घटता है तो ऐसी गति को त्वरित गति कहते हैं। तथा यह बताने के लिए कि वेग में किस दर से परिवर्तन होता है हम एक नई दिशा नई राशि 'त्वरण' का प्रयोग करते हैं। अतः किसी गतिमान वस्तु के वेग में प्रति एकांक  समय अंतराल में होने वाले परिवर्तन को उस वस्तु का त्वरण करते हैं। त्वरण = वेग में परिवर्तन/समयांतराल त्वरण एक सदिश राशि है। न्यूटन के गति विषयक नियम (Newton's law of motion) - गतीविषयक हमारा ज्ञान तीन मूल नियमों पर आधारित है। इनमें सबसे पहले महान वैज्ञानिक सर आइज़क न्यूटन ने सन 1687 में अपनी पुस्तक प्रिंसिया में प्रतिपादित किया इसलिए इस वैज्ञानिक के समानार्थी नियमों को न्यूटन के गति विषयक नियम करते हैं। गति विषयक प्रथम नियम(first laws of Motion) - इस नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में या एक सरल रेखा में समान वेग से गतिशील रहती है उसकी विराम अवस्था या समान गति अवस्था जब उस प...

दूरी(Distance)। विस्थापन(Displacement)। चाल(Speed) । औसत चाल(Average speed)। वेग(Velocity)

 दूरी। Distance किसी दिए गए समय अंतराल में वस्तु द्वारा तय किए गए मार्ग की लंबाई को दूरी कहते हैं। यह एक अदिश राशि है जो सदैव धनात्मक होती है। विस्थापन। (Displacement)- किसी विशेष दिशा में गतिशील वस्तु के स्थित परिवर्तन को उसका विस्थापन कहते हैं। विस्थापन एक सदिश राशि है। ज्ञात है की दूरी व विस्थापन में मुख्य अंतर है यह है की वस्तु का विस्थापन धनात्मक,  ऋणात्मक  व शुन्य कुछ भी हो सकता है । परंतु दूरी सदा धनात्मक होती है। जैसे हम किसी पत्थर को पृथ्वी से 5 मीटर की ऊंचाई तक फेके  तथा पत्थर पुनः अपने स्थान पर वापस लौट आती है इस दशा में पत्थर का विस्थापन तो शुन्य हो जाता है परंतु उसके द्वारा चली गई दूरी 10 मीटर होगी। चाल (Speed)- किसी गतिमान वस्तु में स्थिति परिवर्तन की दर एक सेकंड में चली गई दूरी को उस वस्तु की चाल कहते हैं। चाल = चली गई दूरी/समय  वस्तु की चाल एक सदिश राशि है। वह सदा धनात्मक होती है इसका मात्रक मीटर प्रति सेकंड है। औसत चाल- किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को औसत चाल कहते हैं। औसत चाल = कुल तय की गई दूरी/दूरी को तय करने में लगा समय वेग...

गति। Motion

 Motion. गति हम अपने चारों ओर की सृष्टि को देखकर आते हैं कि कुछ वस्तुओं में समय के साथ साथ उनकी स्थिति में परिवर्तन होता है जबकि कुछ अपने स्थान पर ही स्थिति रहती है उदाहरण के रूप में हमारे सामने से जाती है रेलगाड़ी, मोटर आदि की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन होता है। जबकि मेज पर पड़ी किताब आदि में परिवर्तन नहीं होता है, इससे पता चलता है कि हमारे चारों ओर स्थित बस्तुयें या वस्तुएं जो स्थित है या गतिमान है परंतु वस्तु की यह  स्थिरता अथवा गति हमारे सापेक्ष है, क्योंकि हो सकता है जो वस्तुएं हमें गति में दिखाई देती हैं किसी और दृष्टा की दृष्टि में वह स्थित है जैसे हमारे सामने एक रेलगाड़ी जा रही है तो हमारी अपेक्षा रेलगाड़ी की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन होता है, इसलिए गति कहते हैं की रेलगाड़ी गति में है, परंतु उसमें बैठे यात्री की अपेक्षा से गाड़ी की स्थिति में समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता। अतः उस यात्री की अपेक्षा रेल स्थित है, अतः स्थिरता अथवा गति की अवस्थाओं का वर्णन सापेक्ष होता है। गति के प्रकार मुख्यतः गति को तीन भागों में बांटा जा सकता है- स्थानांतरीय गति(Translatory...

भौतिक विज्ञान

  भौतिक विज्ञान। Physics science Essay. भौतिक विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों तथा द्रव्य से उनकी अन्योन्यक्रिया  क्रियाएं का अध्ययन किया जाता है।        सतत वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सब साबित हो चुका है की ब्रह्मांड द्रव्य और ऊर्जा से मिलकर बना है तथा वह प्रत्येक बस्तु जो स्थान घिरती है,  जिसमें भार होती हैं और जिसका अनुभव हम अपनी ज्ञानिन्द्रयों द्वारा कर सकते हैं, द्रव्य (matter) कहलाती है ।        कुर्सी , लोटा , बाल्टी , आज जिस वस्तु क्रमशः लकड़ी , पीतल , लोहा की बनी होती है , द्रव्य कहलाती है इसमें भार होता है और स्थान घेरती है। वायु, जिसे ना तो हम देख सकते हैं न छू  सकते हैं, किंतु यह स्थान घेरती है और इसमें भार होता है, इसका अनुभव अपनी ज्ञानेद्रियों द्वारा कर सकते हैं। द्रव्य(matter) है। जिन वस्तुओं में भार होता है उनमें द्रव्यमान(Mass) होता है।     किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को द्रव्यमान जब किसी वस्तु पर पृथ्वी की लगाने वाले आकर्षण बल को भार कहते हैं। इसे W=mg ...

सामान्य विज्ञान। General science.

  सामान्य विज्ञान । सामान्य विज्ञान निबंध, लेख । General science. विज्ञान अंग्रेजी के शब्द साइंस science का हिंदी रूपांतरण  है।साइंस की उत्पत्ति , लैटिन भाषा के शब्द scientia से हुई है। Scientia का अर्थ है, ज्ञान (knowledge) नॉलेज या जानना (to know)। वास्तव में इस भौतिक जगत में जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसका क्रमबद्ध अध्ययन ही विज्ञान है। यह स्पष्ट है कि हम अपने चारों ओर की सृष्टि का ज्ञान अपनी ज्ञानेंद्रियों द्वारा कर सकते हैं, परंतु इस भौतिक जगत में कुछ ऐसी अत्यंत सूक्ष्म क्रियाएं हैं जिन का ज्ञान हम सीधे अपने ज्ञानेंद्रियों से नहीं कर सकते। इसके लिए हमें अत्यंत सूक्ष्म ग्राही यंत्रों का प्रयोग करना पड़ता है यह प्रश्न उठता है कि यान से विज्ञान का क्या संबंध है ?  वास्तव में प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन करना तथा उनमें आपस में संबंध ज्ञात करने का नाम है विज्ञान है। थामस हांब्स अनुसार" science is the of consequences and  dependence of one Fact upon another".               प्राकृतिक विज्ञान (Natural Science)- मानव आदिकाल से ही अपने चारो...

रसायन विज्ञान महत्वपूर्ण तथ्य

 महत्वपूर्ण तथ्य। रसायन विज्ञान रसायन विज्ञान भारी जल ड्यूटेरियम का ऑक्साइड है । हाइड्रोजन पराक्साइड का प्रयोग पुराने तैल चित्र के रंगों को पुनः उभारने में किया जाता है। ओजोन गैस में सड़ी मछली की तरह गंध आती है। सोडियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है। कास्टिक सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोक्साइड है। कांसा, तांबें व टीन की मिश्र धातु है। अजेऺन्टाइट चांदी का अयस्क है। पोटेशियम नाइट्रेट को साल्टपीटर कहते हैं। लूनर कास्टिक का रासायनिक नाम सिल्वर नाइट्रेट है। जर्मन सिल्वर तांबें,जस्ते व निकिल की मिश्र धातु है। कापर पाइराइट तांबें का प्रमुख अयस्क है। सिल्वर ब्रोमाइड का प्रयोग फोटोग्राफी व फिल्मों में किया जाता है । अल्मराज में एक भाग सांद्र नाइट्रिक अम्ल व 3 भाग सांन्द्र हाइड्रोक्लोराइड अम्ल होता है। कैलोमल का रासायनिक नाम मरक्यूरिस क्लोराइड है। लोहे में जंग लगना रासायनिक परिवर्तन है। हड्डियों व दातों में कैल्शियम पाया जाता है। वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन और ऑक्सीजन बिजली की चमक के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। रोहिणी जंग लगाने के लिए ऑक्सीजन व नमी आवश्यक है।...

भौतिक विज्ञान। महत्वपूर्ण तथ्य

 भौतिक विज्ञान। महत्वपूर्ण तथ्य। Physics important Fact. प्रकाश वर्ष दूरी मापने की इकाई है। सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हुए ग्रह का वेग बदलता रहता है जब ग्रह सूर्य के समीप होता है तो उसका वेग अधिक होता है जब यह ग्रह दूर होता है तो वेग न्यूनतम होता है। किसी वस्तु का द्रव्यमान सदैव स्थिर रहता है जबकि इसका भार भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है। पृथ्वी तल पर वस्तु का भार भूमध्य रेखा पर सबसे कम व ध्रुवो पर सबसे अधिक होता है । हाइड्रोमीटर से वायु की आद्रता नापी जाती है। प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है। ध्वनि तरंगों निर्वात में गमन नहीं कर सकती। किसी वस्तु और जब द्रव में डुबाया जाता है तो उसके भार में कमी उसके द्वारा विस्थापित किये द्रव के भार के बराबर होती है। जब कोई सेना की टुकड़ी को पार करती है तो सैनिकों को कदम से कदम न मिलाकर चलने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे अनुनाद के कारण पुल टूटने का खतरा रहता है। किसी वस्तु के द्रव्यमान व वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं। घोड़ा गाड़ी को न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार आगे की ओर खींचता है। न्यूटन से पहले आर्य...

सामान्य विज्ञान । General science knowledge of physics

 सामान्य विज्ञान । भौतिक शब्दावली। Physics General Science परम ताप(absolute zero) किसे कहते हैं ? परम ताप न्यूनतम संभव ताप है तथा इसके नीचे कोई ताप संभव नहीं इस ताप पर गैसों के अणुओं की गति शुन्य है।  इसका मान -273.15 डिग्री सेल्सियस होता है इसे केल्विन में व्यक्त करते हैं। त्वरण (acceleration)- क्या होता है? किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं इसका मात्रक मीटर प्रति सेकंड स्क्वायर होता है तथा यह एक सदिश राशि है। कण त्वरक (particle accelerator) क्या होता है? Particle accelerator ऐसी मशीन है जिसके द्वारा आवेशित कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ाई जाती है। इसमें आवेशित कणों को चुंबकीय क्षेत्र में से गुजारा जाता है। ध्वनिकी (acoustic) क्या है?  ध्वनिकी भौतिकी युवा शाखा है जिसके अंतर्गत ध्वनि तरंगों के प्रयोग व उनके गुणों का अध्ययन किया जाता है अल्फा कण (alfa-particles) किसे कहते हैं ? अल्फा कण मुख्यतः हीलियम नाभिक होते हैं। इनकी संरचना 2 protons and two netron के द्वारा होती है। रेडियो एक्टिवता में ये कण नार्भिक से उत्सर्जित उत्सर्जित होते हैं इन पर धन आवेश होता है। व ये...

हिंदू धर्म क्या है । निबंध

हिंदू धर्म क्या है। निबंध  भारत का सर्व प्रमुख धर्म हिंदू धर्म है, जिससे इसकी प्राचीनता एवं विशालता के कारण 'सनातन धर्म'  भी कहा जाता है। ईसाई, इस्लाम , बौद्ध धर्म,  जैन धर्म आदि धर्मों के समान हिंदू धर्म किसी पैगंबर या व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म  नहीं है।  बल्कि यह प्राचीन काल से चले आ रहे विभिन्न धर्मों, मतमतांरों , आस्थाओं एवं विश्वासों का समुच्चय है।  एक विकासशील धर्म होने के कारण विभिन्न कालों में इसमें नए नए आयाम जोड़ दिए गए । वास्तव में हिंदू धर्म उसमें  विशाल परिदृश्य वाला धर्म है की उसमें आदिम ग्राम देवताओं, भूत पिसाच, स्थानीय देवी-देवताओं, झाड़-फूंक, तंत्र मंत्र से लेकर त्रिदेव एवं अन्य देवताओं तथा निराकार ब्रह्म और अत्यंत गुढ़दर्शन तक- सभी बिना किसी अंतर्विरोध के समाहित है और स्थान एवं व्यक्ति विशेष के अनुसार सभी की आराधना होती है । वास्तव में हिंदू धर्म लघु एवं महान परंपराओं का उत्तम संबंध दर्शाता है । एक ओर इसमें वैदिक तथा पुराणकालीन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना होती है, तो दूसरी ओर कापालिक और अवधूतों द्वारा भी अत्यंत भयावह कर्मकांडी...

इस्लाम धर्म क्या है । निबंध

 इस्लाम धर्म क्या है। निबंध  इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद साहब थे, जिनका जन्म 29 अगस्त 570 को सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान में कुरैशियों काबिले के अब्दुल्लाह नामक व्यापारी के घर हुआ था । जन्म के पूर्व ही पिता की और 5 वर्ष की आयु में माता की मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप उनका पालन पोषण उनके दादा मुतल्लिक और चाचा अबू तालिब ने किया था। 25 वर्ष की आयु में उन्होंने खदीजा नामक एक विधवा से विवाह किया । मोहम्मद साहब के जन्म के समय अरबवासी अत्यंत पिछड़ा, कबीलाई और चरवाहों की जिंदगी बिता रहे थे, अतः मोहम्मद साहब ने उन सभी कबिलो लोगों को संगठित करके एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने का प्रयास किया । 15 वर्ष तक व्यापार में लगे होने के पश्चात वह कारोबार छोड़कर चिंतन मनन में लीन हो गए। मक्का के समीप हीरा की चोटी पर कई दिनों तक चिंतनशील रहने के उपरांत उन्हें देवदूत जिबरिल का संदेश प्राप्त हुआ कि वह जाकर कुरान शरीफ के रूप में प्राप्त ईश्वरीय संदेश का प्रचार करें । तत्पश्चात उन्होंने इस्लाम धर्म का प्रचार शुरू किया।  उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया, जिसे मक्का का पुरोहित वर्ग भड़क उठा और ...

ईसाई धर्म क्या है

  ईसाई धर्म क्या है। निबंध। ईसाई धर्म- ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह थे, जिनका जन्म रोमन साम्राज्य के गैलीली प्रांत के नजरथ नामक स्थान पर 6 ईसा पूर्व में हुआ था। उनके पिता जोजेफ एक बढ़ई  थे तथा माता मेरी या (मेरीयम) थी। वे दोनों यहूदी थे। इसाई शास्त्रों के अनुसार मेरी को उनके माता-पिता ने देवदासी के रूप में मंदिर को समर्पित कर दिया था। ईसाई विश्वासों के अनुसार ईसा मसीह के मेरी के गभॆ में आगमन के समय मेरी कुंवारी थी। इसलिए मेरी को ईसाई धर्मा लंबी वर्जिन मेरी या "कुंवारी मेरी" तथा ईसा मसीह को ईश्वर की दिव्य पुरुष मानते हैं। ईसा मसीह के जन्म के समय यहूदी लोग रोम साम्राज्य के अधीन थे। और उससे मुक्ति के लिए व्याकुल थे। उसी समय जॉन दी बैस्टिस्ट नामक एक संत जॉर्डन घाटी में भविष्यवाणी की थी कि यहूदियों की मुक्ति के लिए ईश्वर शीघ्र ही एक मसीहा भेजने वाला है। उस समय ईसा की आयु अधिक नहीं थी परंतु कई वर्षों के एकांतवास के पश्चात उनमें कुछ विशिष्ट शक्तियों का संचार हुआ और उनके स्पर्श से  अंधों को दृष्टि, गूंगों को बाणी, तथा मृतकों को जीवन मिलने लगा, फलतः चारों ओर ईशा को प्रसिद्धि मिल...

बृहस्पतिवार व्रत कथा | Brihaspativar vrat katha | बृहस्पति देव की कथा और आरती || बृहस्पति भगवान की कथा || विष्णु भगवान की व्रत की कथा || विष्णु भगवान की कथा और आरती Lyrics || brihaspativar vrat katha || वीरवार की व्रत कथा आरती || brihaspativar vrat katha aarti

 बृहस्पतिवार व्रत कथा। बृहस्पति देव की कथा और आरती || बृहस्पति भगवान की कथा || विष्णु भगवान की व्रत की कथा || विष्णु भगवान की कथा और आरती Lyrics || brihaspativar vrat katha  || वीरवार की व्रत कथा आरती || brihaspativar vrat katha aarti भगवान बृहस्पति देव की पूजा अर्चना के लिए बृहस्पतिवार को व्रत करके बृहस्पतिवार की व्रत कथा को पढ़ने अथवा किसी दूसरे स्त्री पुरुष द्वारा सुनने की प्राचीन परंपरा है। बृहस्पतिवार का व्रत करने और व्रत कथा सुनने से स्त्री पुरुषों की सभी मनोकामना मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत से धन संपत्ति की प्राप्ति होती है। नीः संतानों की को पुत्र प्राप्त होती है परिवार में सुख शांति बनी रहती है सभी आनंद पूर्वक रहते हैं। व्रत करने की विधि  बृहस्पतिवार को सूर्य उदय से पहले उठकर स्नान आदि से निर्मित होकर, भगवान बृहस्पति देव का स्मरण करते हुए व्रत का प्रारंभ करना चाहिए। उपासक को घर के किसी कक्ष में छोटा अथवा बड़ा पूजा स्थल बनाकर उसमें भगवान बृहस्पति की पूजा की जा सकती है। भगवान बृहस्पति देव पूजा में पीले रंग के पुष्प और पीले रंग की...

LIC IPO आईपीओ एलआईसी भारतीय जीवन बीमा

  एल आई सी आई पी ओ। LIC IPO। एलआईसी आईपीओ में पैसा लगाना चाहते हैं तो यह बातें जान लीजिए, फायदे में रहेंगें। आईपीओ के बाद भी एल आई सी पर सरकार का मालिकाना हक बना रहेगा कानून के मुताबिक एलआईसी में भारत सरकार की हिस्सेदारी ५१% से कम नहीं हो सकती इसके अलावा 5 साल के दौरान सरकार भारतीय सरकार एल आई सी में अपनी 25 फ़ीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं बेच सकतीं हैं।  एल आई सी का आईपीओ मार्च में आ रहा है इस हफ्ते सरकार इसके लिए सेबी के पास draft पेपर फाइल कर देगी। एलआईसी की पॉलिसी रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। उम्मीद है कि इस आईपीओ का 10 फिसदी हिस्सा उनके लिए रिजर्व होगा। इससे उन्हें शेयर मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके अलावा उन्हें प्रति शेयर कीमत में कुछ डिस्काउंट मिलने की उम्मीद है। एल आई सी पर सरकार का मालिकाना हक  अभी एलआईसी का मालिकाना हक भारतीय सरकार के पास है। यह देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है। सरकार इस कंपनी में हिस्सेदारी बेचकर करीब 90000 करोड़ रूपए जुटाना चाहती है। इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष के डिश इन वेस्ट मेंट टारगेट को हासिल करने में मदद मिलेगी। आईपीओ के...